शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

२०१२ के लोकतंत्र के कुंभ से पहले मतदाता सूचि में नाम जुडवाने का अंतिम अवसर

आम चुनाव को लोकतंत्र का कुंभ कहा जाता है। संविधान निर्माताओं ने इस कुंभ के लिये पाँच वर्ष की समयावधि तय की थी परन्तु अनेकानेक कारणों के चलते कुछ राज्यों में यह मध्यावधि कुंभ अपनी निर्धारित अवधि से पहले ही आ जाता है। उत्तर प्रदेश में आने वाला वर्ष इस लोकतांत्रिक कुंभ का साक्षी रहने वाला है। इस कुंभ की पवित्रता बनाये रखने के लिये संविधान में जिस शीर्ष शंकराचार्य की व्यवस्था की है उसे भारत का मुख्य निर्वाचन आयुक्त कहा जाता है।



समूचे देश में इस लोकतांत्रिक कुंभ का संचालन करने वाले शीर्ष शंकराचार्य ने राज्यों में स्थापित अपने मठों (कार्यालयों ) में भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में अपने अपने प्रतिनिधि शंकराचार्य को नियुक्त कर रखा है जो इस महाकुंभ के निष्पक्ष और पवित्रता के लिये सभी जरूरी उपायों को बेरोकटोक अमल में लाते हैं।

इन्हीं उपायों में से प्राथमिक उपाय होता है कि पूरे प्रदेश में अधिकारियों को बदल दिया जाय ताकि निकट भविष्य में प्रतीक्षित लोकतांत्रिक कुंभ के संचालन हेतु निष्पक्ष भूमि तैयार की जा सके। निर्वाचन आयोग ने अनेक अवसरों पर यह घोषित भी किया है कि आई0 ए0 एस0 सहित अन्य सिविल और राजस्व सेवा के अधिकारी ही उसकी आंखें और कान होते हैं। इन निर्देशों ने मुझे भी आनन फानन में कलक्ट्रªेट लखनऊ में दाखिल होने के अवसर को उपलब्ध करा दिया है।


आने वाले वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश में इस लोकतांत्रिक कुंभ की पवित्रता बनाये रखने के लिये प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस कुंभ की तैयारी का विगुल विगत 29 सितम्बर को फूंक दिया है। इस दिन से लगातार तीन माह तक लोकतांत्रिक कुंभ में डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बनने वाले प्रत्येक भक्त के लिये अनिवार्य पंजीकरण के द्वार खोले गये हैं।
दिनांक 1 जनवरी 2012 को अट्ठारह वर्ष की उम्र प्राप्त करने वाले प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को इस कुंभ में डुबकी लगवाने के लिये सुनिश्चित पंजीकरण करने की व्यवथा इस महाकुंभ के शंकराचार्य ने की है।

प्रत्येक पोलिंग बूथ पर मतदाता सूचियां इस अवधि में उपलब्ध रहेंगी जिसमें नया नाम जोडना पुराने त्रुटिपूर्ण नाम में बाहर जा चुके मतदाता का नाम सूचियों से हटाने का कार्य इस अवधि के दौरान विशेष अभियान लगाकर किया जा रहा है। साथ ही साथ विभिन्न महावि़द्यालयो में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आम छात्र जो भविष्य का देश निर्माता है उसे मतदाता बनने हेतु जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है।

लगभग सभी सार्वजनिक स्थानो यथा माल , विद्यालयों , विभागीय मुख्यालयों तथा बैंको पर ड्राप बाक्स रखते हुये मतदाता सूची को 1 जनवरी 2012 की तिथि तक अद्यतन करने का अभियान चलाया जा रहा है।


ऐसे ही एक कार्यक्रम में राजकीय नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कालेज में काल्विन तालुकेदार्स कालेज के अपने पूर्व सहयोगियों और विगत दशक में इस पोस्ट ग्रेजुएट कालेज को एक विशेष पहचान दिलाने वाले प्रधानाचार्य से मिलने का सुखद अवसर मिला।

5 टिप्‍पणियां:

  1. चला बिहारी ब्लॉगर बनने माता का भक्त भला
    बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे, झरना फूट चला
    महिला-पुरुष विमर्शी गाथा, इतिहासिक दृष्टि डला
    शुक्ला बोल पड़े मतदाता, कोलाहल बड़ा खला

    लिंक आपकी रचना का है
    अगर नहीं इस प्रस्तुति में,
    चर्चा-मंच घूमने यूँ ही,
    आप नहीं क्या आयेंगे ??
    चर्चा-मंच ६७६ रविवार

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. बहुत हि सही लिखा है आपने!
    साधुवाद!
    दिवाली कि हार्दिक शुभकामनाएं!

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  3. बहुत बढ़िया जानकारी दी है आपने .सार्थक पोस्ट..

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  4. गागर में सागर भर दिया है आपने । आपके पोस्ट पर आना अच्छा लगा । मेर पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

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