शनिवार, 23 नवंबर 2013

मूर्तियां भी रंग चुकी हैं चुनावी रंग में

आजकल माहौल चुनावी है । गांव गांव में जागरूकता है और राजनैतिक चर्चाऐं हो रहीं हैं। यह लोकतंत्र में प्रतिनिधि चुनने की व्यवस्था के क्रम में एक अच्छा कदम है। 

ऐसे माहौल में बीते दिन एक गांव जाना हुआ। गांव के बाहर स्थित अंबेडकर पार्क में गौतम बुद्ध और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा देखकर स्वयं को उसकी तस्वीर मोबाइल में कैद करने से नहीं रोक सका क्योकि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी की इस प्रतिमा का रंग सामान्यः नजर आने वाली अंबेडकर जी प्रतिमाओं से भिन्न था।

विगत कुछ वर्षो में यह देखने को मिला है कि विभिन्न राजनैतिक दलों ने रंगों को भी जैसे अपने दल के लिये पेटेन्ट ही करा लिया है। 

ऐसे माहौल में इस ग्रामीण पार्क में स्थापित यह मूर्ति भी जैसे चुनावी महौल में रंग चुकी है। 

गेरूये रंग में रंगी यह मूर्ति कहीं आने वाले लोकसभा चुनाव के परिणाम की चुगली तो नहीं कर रही है ?

गेरूये रंग में रंगी यह मूर्ति कहीं आने वाले लोकसभा चुनाव के परिणाम की चुगली तो नहीं कर रही है 


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (25-11-2013) को "उपेक्षा का दंश" (चर्चा मंचःअंक-1441) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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