
मोबाइल आज हमारी जीवन-चर्या का अहम् हिस्सा है। मोबाइल पर आने वाली वाली कालें ही हमारे दैनिक क्रियाकलापों को नियंत्रित करती हैं। कई बार मोबाइल पर आने वाली कालों को हम चाहकर भी रिसीव नहीं करते हैं ऐसे में ये मिस्ड कालें भी बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह जाती हैं। ऐसी ही एक मिस्ड काल को व्यक्त करती मेरी कुछ पंक्तियाँ 4 जुलाई को साहित्य प्रेमी संघ के पटल पर प्रकाशित हुयी है। जिन तक पहुँचने के लिये कृपया आगे दिया गया लिंक क्लिक करें .......
.....*साहित्य प्रेमी संघ*:->साहित्य पुष्पों की खुशबु फैलाता एक संयुक्त ब्लॉग....
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