हमारे विवाह को अब बीस साल हो चले हैं। सरकारी कामों की हमें चाहें कितनी भी व्यस्तता क्यों न हुये हों लेकिन अब तक हम प्रत्येेक वर्षगांठ का दिन जिम्मेदारियों से बचाकर रखने में सफल रहे हैं। सामान्यतः हर वर्ष अपनी विवाह की वर्षगांठ मनाने हम किसी न किसी धार्मिक स्थल पर जाते है। (यह बात अलग है कि एक ही स्थान पर कई कई बार भी जा चुके है) कुछ पुराने मजेदार किस्से हैं विवाह की वर्षगांठ के जिन्हे फिर कभी। आज तो इस साल की वर्षगांठ का ताजा ताजा तरीन किस्सा यात्रा वृतांत के रूप में प्रस्तुता है।
चित्र1 पिथौरागढ़ जाने के लिये राष्ट्रीय मार्ग एन एच 09
उत्राखण्ड राज्य में प्रवेश करने के लिये तराई श्रेत्र में हल्द्धानी ,टनकपुर, कोटद्धार ऋषिकेष आदि अनेक प्रवेश द्वार हैं। यह सभी स्थान पहाड की सीमा आरंभ होने का संदेश देते हैं पर्वतीय क्षेत्र में आगे बढने के साथ ही जहाँ आपको ठेठ पर्वतीय संस्कृति के दर्शन मिलने लगते हैं वहीं इन सभी स्थानों पर वहुभाषी संस्कृति देखने को मिलती है । इन्हीं प्रवेश द्वारों में से एक प्रवेश द्वार है टनकपुर , जहाँ माँ पुण्यागिरि का दर्शन करने के बाद हमारी यात्रा का अगला पड़ाव मुख्य पर्वतीय क्षेत्र में प्रवेश का था। टनकपुर से प्रसिद्ध सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ जाने के लिये राष्ट्रीय मार्ग एन एच 09 हैं। इस मार्ग से यात्रा आरंभ करना बड़ा सुखद लगता है लेकिन अभी तीस चालीस किलोमीटर ही चले होंगे कि भूस्खलन के चलत राष्ट्रीय राजमार्ग की दुर्दशा प्रगट होने लगी।