(1)
फट गयी है
आसमान की झोली
धरा यूँ बोली
(1)
फट गयी है
आसमान की झोली
धरा यूँ बोली
(2)
बादल छाये
धरती पर ऐसे
मोहिनी जैसे
अब आप के साथ इस (हाइकू) को इस आशा के साथ बाँट रहा हूँ कि शायद आप ही इस सुराग के माध्यम से रहस्योद्घाटन कर सकें।
सरहदों के पार से आती नई कविता की बयार>
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बहुत सुन्दर ||
जवाब देंहटाएंबधाई ||
बहुत पसन्द आया
जवाब देंहटाएंहमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद